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बंधन मैरिज हॉल में शिव शिष्यों की एक संगोष्ठी सह शिवचर्चा का आयोजन किया गया। इस आयोजन में शिव के गुरू स्वरूप से जनमानस को जोड़ने पर वृहद् चर्चा की गई । इस अवसर पर राँची से अर्चित आनंद जी ने लोगों चर्चा की । श्री अर्चित आनंद मुख्य सलाहकार हैं(शिव शिष्य परिवार)राँची के।अर्चित आनंद ने शिवशिष्यों/शिष्याओं को सम्बोधित करते हुए कहा की साहब श्री हरीन्द्रानंद जी जिन्होंने शिव के गुरू स्वरूप को जन जन में स्थापित करने में अपना संपूर्ण जीवन बिता दिया उनकी सहयोगी के रूप में दीदी नीलम आनंद ने भी अपना सर्वश्रेष्ठ दिया गुरू कार्य को बढ़ाने में,आज जब दोनो शरीर में नहीं है तो हमसब की ज़िम्मेवारी और बढ़ जाती है।साहब कहते थे कि शिव तो घर घर के बाबा हैं और जब शिव भगवान के रूप में सबकुछ देते हैं तो गुरु के रूप में ज्ञान भी देंगे । आज के समय में शिव के गुरु स्वरूप से जुड़ कर पूरी दुनिया में लगभग पांच करोड़ लोग अपना आध्यात्मिक उत्थान कर रहे हैं । हमारा उद्देश्य वही होना चाहिए जो साहब दीदी का है । अर्चित आनंद ने कहा कि शिव चर्चा में अंधविश्वास की कोई जगह नहीं है । जीवन जीने का वैज्ञानिक दृष्टिकोण होना चाहिए । शिव तो तीनों लोकों के स्वामी हैं और वो गुरु का भी कार्य करते हैं । उनके बताए रास्तों पर हम सब को चलना है । इस पवित्र अवसर पर मुख्य रूप से श्री आलोक,श्री बीरबल,श्री सोमेंद्र , श्री नंदू प्रसाद , श्री यमुना , श्री अरविंद सहित अन्य उपस्थित थे।

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