पलामू (झारखंड):जिले के पांडू प्रखंड में पंचायत भवनों में संचालित ज्ञान केंद्र केवल कागजों पर ही चल रहे हैं। सरकार द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में ज्ञान केंद्र खोलने की योजना बनाई गई थी, ताकि ग्रामीण क्षेत्र में पठन-पाठन को बढ़ावा दिया जा सके और युवाओं को स्व-शिक्षा व सीखने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध हो सकें। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
पांडू प्रखंड की कई पंचायतों में ये ज्ञान केंद्र न तो नियमित रूप से खुलते हैं, और ना ही वहा पढ़ने की सामग्री या उपकरणों का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। कुछ पंचायतों में तो पुस्तकें और कंप्यूटर जैसी जरूरी सामग्री पहले ही पहुंचा दी गई है, लेकिन जनप्रतिनिधियों और पंचायत कर्मियों की उदासीनता के चलते ये केंद्र शुरू ही नहीं हो सके हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई पंचायतों के ग्रामीण अब तक इस ज्ञान केंद्र की मौजूदगी से ही अनजान हैं। ऐसे में सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना फाइलों और कागजों तक ही सीमित रह गई है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह योजना अपने उद्देश्य में पूरी तरह विफल साबित होगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इन ज्ञान केंद्रों को जल्द से जल्द क्रियाशील बनाया जाए, ताकि युवा वर्ग को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।
पाण्डु प्रखंड से झारखंड दृष्टि संवाददाता नईम अंसारी की रिपोर्ट

