
खरौंधी । प्रखंड में बुधवार को ड्रग इंस्पेक्टर कैलाश मुंडा द्वारा की गई छापेमारी से दवा दुकानदारों में हड़कंप मच गया। जांच की सूचना मिलते ही कई मेडिकल स्टोर संचालक अपनी दुकानें बंद कर मौके से फरार हो गए।जांच के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर ने आधा दर्जन दुकानों की जांच की और कुछ दवाओं के सैंपल अपने साथ ले गए। जानकारी के अनुसार, खरौंधी बाजार में करीब सात थोक दवा विक्रेता हैं, जबकि खुदरा दवा विक्रेता के रूप में केवल एक ही दुकान का विधिवत निबंधन है। हैरानी की बात यह है कि पूरे प्रखंड में एक भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं होने के बावजूद यहां दर्जनों दुकानों से बड़े पैमाने पर दवाओं की बिक्री की जा रही है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दुकानों में नशीली दवाओं और इंजेक्शन की बिक्री खुलेआम की जाती है। साथ ही एक ही लाइसेंस पर कई दुकानें संचालित होने तथा ग्राहकों को कंप्यूटरीकृत बिल नहीं दिए जाने की भी शिकायतें हैं। इससे पहले भी बाजार में एक्सपायरी दवाओं की बिक्री के मामले सामने आ चुके हैं।
कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया की जांच के नाम पर अवैध वसूली की जाती है और ठोस कार्रवाई नहीं होती, जिससे बाजारवासियों में आक्रोश व्याप्त है।वहीं कांग्रेस के जिला प्रवक्ता राहुल दुबे ने आरोप लगाते हुए कहा कि जांच के दौरान लगभग दो लाख रुपये की अवैध वसूली की गई है, जिसकी वे कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर कार्रवाई की मांग की जाएगी।इधर, ड्रग इंस्पेक्टर कैलाश मुंडा ने बताया कि उपायुक्त के निर्देश पर तीन से चार मेडिकल स्टोरों की जांच की गई है तथा कुछ दवाओं के सैंपल लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच की सूचना मिलते ही कई दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर चले गए, जिससे संदेह और गहरा होता है।