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बिशुनपुरा संवाददाता सुनील कुमार की रिपोर्ट

बिशुनपुरा। प्रखंड के ग्राम पिपरी खुर्द में पहली बार बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध जी की जयंती मनाई गई।
यह आयोजन श्री रमेश पासवान उर्फ लेखवर्धन बौद्ध जी के आवास पर आयोजित की गई थी।
इस अवसर पर श्री इंद्रजीत ठाकुर, श्री शंकर चौधरी, श्री उदय कुमार बौद्ध, धर्मेंद्र पासवान, श्री इंद्रजीत पासवान, ठाकुर सत्यनारायण विभूति सहित बहूत संख्या में पुरुष व महिलाएं भी शामिल हुई।
प्रमुख वक्ताओं में ठाकुर सत्यनारायण विभूति ने कहा कि मुझे बहुत जिज्ञासा रहती थी कि बौद्ध धर्म मे आखिर क्या है जो विश्व के बहुत सारे विकसित देशों ने इसे अपना रखा है। सो इसको नजदीक से जानने-समझने के लिये ही मैं ऐसे समारोह में शामिल होता हूँ। और यह मेरा सौभाग्य है कि यह ज्ञान मेरे गाँव मे ही मिल रहा है।

क्या है बौद्ध धर्म का इतिहास?

देश और दुनिया में अलग-अलग धर्म के लोग रहते हैं. भारत में भी विभिन्न धर्मों के लोग निवास करते हैं. दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धर्म बौद्ध धर्म माना जाता है. इस धर्म के लोग अधिकतर चीन, कोरिया, जापान, श्रीलंका, भारत आदि देशों में रहते हैं. बौद्ध धर्म की उत्पत्ति ईसाई और इस्लाम धर्म से पहले हुई थी।

कैसे शुरू हुआ बौद्ध धर्म?बौद्ध धर्म एक प्राचीन भारतीय धर्म है. बताया जाता है कि 2600 वर्ष पहले इसकी स्थापना भगवान बुद्ध ने की थी. यह दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के महत्वपूर्ण धर्मों में से एक है. धर्म लगभग 563 ईसा पूर्व में शुरू हुआ, जो सिद्धार्थ गौतम की शिक्षाओं, जीवन के अनुभवों पर आधारित है.

*बौद्ध धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें*
भगवान बुद्ध का असली नाम सिद्धार्थ गौतम था. “ईसा पूर्व 623 – ईसा पूर्व 543” को बुद्ध का जीवनकाल माना जाता है. बुद्ध ने अपने अनुयायियों को सांसारिक सुखों में भोग के दो चरम, सख्त संयम और तपस्या के अभ्यास से बचने के लिए कहा।
श्री इंद्रजीत ठाकुर ने कहा कि दुनिया मे।दुःख है तो उसका कारण भी मनुष्य ही है। और इसका निवारण गौतम बुद्ध ने बताया कि सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अस्तेय का पालन कीजिये और धरती पर ही स्वर्ग का आनंद पाईये।
कार्यक्रम के आयोजक श्री रमेश पासवान जी ने बताया कि वर्षो से हम बोकारो तरफ बुद्ध पूर्णिमा मनाते आये हैं पर अब अपने गाँव मे मनाकर मुझे बहुत संतुष्टि हुई। इस अवसर पर उन्होंने महात्मा बुद्ध की जीवनी व शिक्षाओं को विस्तार से बताया।
पिपरी कला से आये उदय कुमार बौद्ध जी ने कहा की जहाँ भी इस तरह के आयोजन होंतें हैं वहाँ मैं पहुँच ही जाता हूँ।

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Admin Garhwa Drishti

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