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पत्थर खदानों में हो रहे ब्लास्टिंग से दहल रहा इलाका, खौफ़ में जी रहे हैं लोग - Garhwa Drishti

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पलामू जिला ब्यूरो चीफ लवकुश कुमार सिंह की रिपोर्ट
इलाके में क़ायदे क़ानून को ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैं पत्थर उद्योग

बारूद के दुर्गंध से लोगो को सांस लेना हुआ मुश्किल शिकायत के बाद भी अधिकारियों के कानों पर रेंगती नही जूं

छतरपुर : (पलामू ) कहते हैं कि आधुनिकता हमेशा अपने साथ विनाश लेकर आती है और यह कहावत पलामू जिले के छतरपुर क्षेत्र में साफ चरितार्थ होता भी दिख रहा है। जी हां यह हम नहीं कह रहे बल्कि इलाके में तेज़ी से फलते फूलते पत्थर उद्योग के कारण चीख चीख कर यह कह रहे छतरपुर नगर पंचायत क्षेत्र के करमाकला एवं लोहराही के निवासी। इन इलाके के लोग पत्थर खदान में हादसे में जान तक गंवा चुके है। वहीं माइंस की बात करें तो त्रस्त लोग अब कहने लगे हैं कि जान देंगे लेकिन माइंस के लिए ज़मीन नहीं देंगे। आलम यह है कि इलाके में संचालित पत्थर माइंस में जमकर नियमों की धज्जियां उडाई जा रही है। ऐसा नहीं है कि इस मामले की सूचना सम्बंधित विभाग को नहीं है लेकिन कार्रवाई के नाम पर दे लेकर मामला सेट कर दिया जाता है। सूत्र बताते हैं की स्थानीय अधिकारियों और माईनिंग विभाग का तो इस उद्योग में माहवारी बंधा है, जिसके कारण यहां मनमानी चालू है यही कारण है कि माईनिंग अधिकारी पत्थर माइंस एवं क्रशर मशीनों पर जाने की जहमत भी नहीं उठाते। हालत यह है की पत्थर माइंस एवं क्रशरों के आप-पास रहने वालों का जीना मुहाल है। पत्थर माइंस एवं क्रशर मशीन संचालक द्वारा खुलेआम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों की धज्जियां उडाई जा रही है। परेशान लोग बताते है कि बॉस्टिंग से घरों के दीवारे में दरारें आ गई है । ब्लास्टिंग से बारूद के दुर्गंध से आसपास के लोग श्वांस सम्बन्धी बीमारी के चपेट में भी आने लगे हैं। लोग यह भी बताते हैं कि बॉस्टिंग से निकलने वाले दुर्गंध हवा में घुलकर राहगीरों सहित आस पास में रहने वाले लोगों की सेहत पर खतरा बने हुए हैं। आलम यह है कि पत्थर माइंस एवं क्रशर मशीनों के आप पास रहने वाले लोगों को न तो शुद्ध हवा मिल पा रही है और नाही शुद्ध पानी। लोग बताते हैं कि इलाके में अब लोग गंभीर बीमारियों से ग्रसित भी हो रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि लोग अब जाएं तो जाएं कहाँ, लोग बताते हैं कि इलाके में होनेवाले माइनिंग का असर अब चापाकल के बोर पर भी पड़ने लगा है ब्लास्टिंग से कई चापाकल बोर भी भसक चुके हैं
लोगों की माने तो यही नहीं माइंस में विस्फोट के बाद उड़ते पत्थर लोगों के शरीर ही नहीं बल्कि आत्मा को भी घायल करने लगे हैं सवाल यह भी है कि बेबस इंसान किससे लगाए न्याय और सुरक्षा की गुहार, इलाके में ग्रामीणों के साथ माइंस वालों की झड़प भी होती रहती है और इसकी कीमत प्रशासन की मिलीभगत से निरपराध लोगों को जेल जा कर चुकानी उड़ती है। अगर शीघ्र ही इन गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाया गया तो इलाके पर गंभीर पारिस्थिकीय ख़तरा भी मंडराने लगा है, जिसे वक़्त रहते ठीक कर लेने की जरूरत है।

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