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दानरो नदी स्टैंड से प्रतिवर्ष दुकानदारों का अतिक्रमण के नाम पर उजड़ा जाता है तो सरस्वती नदी एवं तिलैया नदी जो वर्तमान समय में नाली का रूप ले लिया है वहां जो स्थाई पक्का मकान का निर्माण करा कर अतिक्रमण किया गया है वहां कार्यवाही क्यों नहीं होता है? दानरो नदी में विभिन्न क्लबो द्वारा आधा दर्जन भवन का निर्माण किया गया है साथ ही नगर परिषद द्वारा कई शौचालय बनाकर ताला जड़ा गया है । उसे कोर्ट का हवाला देकर क्यों नहीं हटाया जाता है ? अधिकारी अतिक्रमण करें तो सही और यदि एक गरीब पेट पालने के लिए चार-पांच फीट में घूमती रखे तो गलत।
जब नदी में स्टैंड बना है तो झुग्गी झोपड़ी, गुमटी तो वहां होगा ही । प्रत्येक दिन नगर परिषद को ₹15 दुकान का टैक्स दिया जाता है फिर भी जिला प्रशासन के द्वारा प्रत्येक वर्ष उच्च न्यायालय का हवाला देते हुए जबरन गरीबों को अतिक्रमण के नाम पर परेशान किया जाता है। पिछले कई वर्षों से इस संबंध में कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद गढ़वा, अनुमंडल पदाधिकारी गढ़वा तथा उपायुक्त गढ़वा का सूचना दिया गया है तथा पत्र के माध्यम से ध्यान आकर्षित भी कराया गया है लेकिन किसी को इससे कोई मतलब नहीं है। अधिकारी आते हैं गरीबों को उजाड़ने की भरपूर कोशिश करते हैं और चले जाते हैं , लेकिन कोई इस संबंध में पहल नहीं करता है कि इतने वर्षों से उसे स्थान पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों को कोई जगह पर दुकान बनाकर इन्हें दिया जाए । जिससे इनका जीवकोपार्जन ठीक से हो सके।
दानरो नदी स्टैंड के अगल-बगल खाली जमीन पर दुकान बनाकर यहां के गरीब कार्ड धारी दुकानदारों को निष्पक्ष तरीके से दुकान का आवंटन किया जाए, इसका मांग कई वर्षों से किया जा रहा है लेकिन गरीबों का बात नहीं सुना जाता है उजाड़े गए दुकानदारों का घर का खर्चा कैसे चले इस पर जिला प्रशासन द्वारा मंथन कर दुकान लगाने का जगह मुहैया कराया जाए । ऐसा नहीं होने पर उजड़े गए लोगों के साथ सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होंगे जिसका जवाबदेही प्रशासन की होगी । जल्द ही आंदोलन का रूपरेखा तय करने के संबंध में उजाड़े गए दुकानदारों के द्वारा सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाएगा ।
