ग्रामीण जिला ब्यूरो सुनील कुमार कि रिपोर्ट
जतपुरा (बिशुनपुरा) – प्रखंड क्षेत्र की सरांग पंचायत अंतर्गत जतपुरा गांव में मंगलवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाई गई। अंबेडकर चौक (वार्ड संख्या-2) पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में ग्रामीणों की भारी भीड़ देखने को मिली, जिससे पूरा माहौल उत्सवमय हो गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन, सामाजिक न्याय के लिए उनके योगदान और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहब ने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार मानते हुए समाज में फैली ऊंच-नीच और छुआछूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ आजीवन लड़ाई लड़ी। उनका प्रसिद्ध संदेश—
“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”
आज भी समाज को आगे बढ़ने की दिशा देता है।
बताया गया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। उन्होंने Columbia University और London School of Economics से उच्च शिक्षा प्राप्त की। स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण में उनकी अहम भूमिका रही और वे प्रारूप समिति के अध्यक्ष बनाए गए। उनके नेतृत्व में दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान तैयार हुआ, जो सभी नागरिकों को समानता और स्वतंत्रता का अधिकार देता है।
वर्ष 1990 में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म ग्रहण कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने बाबा साहब के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया और शांतिपूर्ण वातावरण में प्रसाद वितरण किया गया। यह आयोजन क्षेत्र में सामाजिक एकता और जागरूकता का मजबूत संदेश देकर समाप्त हुआ।
समारोह में सीताराम, सुदामा राम, रामाश्रय राम, ठाकुर सत्यनारायण विभूति, डॉ. यशवंत प्रजापति, प्रदीप राम, सिद्धेश्वर राम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित रहे।