
अनुमंडल ब्यूरो राहुल वर्मा कि रिपोर्ट
रमना -विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को रमना प्रखंड के जीरुआ गांव के जंगल में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक अनूठी और बेहद सराहनीय पहल देखी गई। यहां वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।जिसमें देवतुल्य पेड़-पौधों की पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके पश्चात, उपस्थित माताओं, बहनों और ग्रामीणों ने पेड़ों को रक्षासूत्र (राखी) बांधकर उनकी रक्षा करने का सामूहिक संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि डीएफओ अंशुमान ने कहा- ‘पेड़ हैं तो हमारा अस्तित्व है’। पेड़-पौधों के बिना मानव जीवन की कल्पना भी असंभव है। उन्होंने कहा, “आज ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण असंतुलन के दौर में पेड़ों को बचाना और नए पौधे लगाना बेहद जरूरी हो गया है। जीरुआ गांव के लोगों ने पेड़ों को राखी बांधकर जो संकल्प लिया है, वह पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल है।” वक्ताओं ने पेड़-पौधों से होने वाले लाभों, जैसे ऑक्सीजन, फल, छाया और वर्षा, के साथ-साथ वनों की कटाई से होने वाले भारी नुकसान और सूखे जैसी आपदाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।रेंजर प्रमोद ठाकुर और जिला परिषद अध्यक्ष शांति देवी उपस्थित रहीं। जिप अध्यक्ष शांति देवी ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा में महिलाओं की भागीदारी हमेशा से अनुकरणीय रही है और आज की यह पहल हमारी संस्कृति को दर्शाती है। वरिष्ठ नेता ताहिर अंसारी ने भी ग्रामीणों का उत्साहवर्धन करते हुए हर घर में कम से कम एक पौधा लगाने की अपील की। कार्यक्रम को मुखिया पानपति देवी , पत्रकार महेन्द्र प्रसाद गुप्ता और सत्यप्रकाश रवानी ने भी संबोधित किया।कार्यक्रम का कुशल एवं सफल संचालन प्रभारी वनपाल नीरज कुमार मेहता द्वारा किया गया। उन्होंने पर्यावरण चेतना को जगाने वाली पंक्तियों के साथ कार्यक्रम को गति दी और अंत में उपस्थित सभी अतिथियों व ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने एक सुर में नारा लगाया— “पेड़-पौधे लगाएंगे, पर्यावरण बचाएंगे।”
मौके पर मुख्य रूप से वनपाल पुष्पराज सिंह ,वनरक्षी सचिन कुमार,प्रवीण शुक्ला, ध्रुव कुमार,राजू कुमार ,राजीव रंजन कुमार ,मनीष टोप्पो ,शशिकांत तिर्की ,बाबूलाल गुप्ता,अजय टाईगर, अनुज चंद्रवंशी , गोविंदर सिंह ,संजय सिंह, सुनीता देवी , चंदन कुमार पाल आदि मौजूद थे।