गढ़वा से विकाश कुशवाहा की रिपोर्ट
*सोशल मीडिया के अमर्यादित पोस्ट पर गढ़वा पुलिस संज्ञान ले : धीरज*
झारखंड मुक्ति मोर्चा के मीडिया पैनलिस्ट सह केंद्रीय सदस्य धीरज दुबे ने गढ़वा पुलिस प्रशासन से सोशल मीडिया पर लगातार किए जा रहे अमर्यादित एवं भ्रामक पोस्ट पर स्वतः संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है, लेकिन इस स्वतंत्रता का प्रयोग किसी व्यक्ति का मान-मर्दन करने, अपमानित करने अथवा अमर्यादित भाषा का उपयोग करने के लिए नहीं किया जा सकता।
धीरज दुबे ने कहा कि पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिना किसी तथ्य एवं पुख्ता प्रमाण के लोगों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट किए जा रहे हैं। कई मामलों में जातीय एवं धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले पोस्ट भी लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे समाज में विद्वेष और तनाव का माहौल बन रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि युवाओं और आम लोगों के बीच गलत मनोवैज्ञानिक वातावरण भी तैयार कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार सभी को है, लेकिन व्यक्तिगत चरित्र हनन, गाली-गलौज, झूठे आरोप और समाज को बांटने वाली भाषा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। सोशल मीडिया का उपयोग समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संवाद के लिए होना चाहिए, न कि लोगों को अपमानित करने और विवाद फैलाने के लिए।
धीरज दुबे ने गढ़वा पुलिस प्रशासन से आग्रह किया कि ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि सोशल मीडिया पर बढ़ रही अमानवीय एवं असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर समाज में नकारात्मकता और वैमनस्य और अधिक बढ़ सकता है।