खरौंधी प्रखंड से चंदेश कुमार पटेल कि रिपोर्ट
खरौंधी(गढ़वा): प्रखंड कार्यालय के बगल में लगभग 3.50 करोड़ की लागत से बनने वाला 100 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
एक भी डॉक्टर का प्रतिनियुक्ति नही होने से लगभग 10 वर्षो से बंद है। हॉस्पिटल लंबे समय से बंद होने के कारण खंडहर में तब्दील होने लगा है। जिससे प्रखंड के लगभग 80 हजार की आबादी भगवान भरोसे जीने के लिये मजबूर हैं। प्रखंड में सरकार करोड़ों की लागत से हॉस्पिटल तो बना दिया। परंतु इसमे आजतक एक भी डॉक्टर तक की व्यवस्था नहीं की गयी। गढ़वा उपायुक्त राजेश कुमार पाठक ने लगभग एक माह पूर्व सिविल सर्जन को डॉक्टर का प्रतिनियुक्ति कर चालू कराने का आदेश दिया था इसके बावजूद भी हॉस्पिटल बंद है। जानकारी के अनुसार प्रखंड कार्यालय के बगल मे लगभग साढ़े तीन करोड़ की लागत से बनने वाला भवन का शिलान्यास तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री वर्तमान विधायक भानू प्रताप शाही ने 2007 मे किया था। जबकि हॉस्पिटल बनकर तैयार होने पर इसका उद्घाटन तत्कालीन विधायक अनंत प्रताप देव ने किया था। परंतु आज तक इस भवन मे प्रखंडवासियों के इलाज के लिये चिकित्सीय व्यवस्था नही की गई। आज हॉस्पिटल का स्थिति यह है कि भवन जर्जर होते जा रहे हैं। इसके मुख्य दरवाजा के बगल वाले दरवाजा को शरारती तत्व के लोगों ने तोड़ दिया है। हॉस्पिटल के अंदर के सारे कीमती सामान को चोर चुरा ले गये। आज हॉस्पिटल का भवन नशेड़ीओ तथा जुआरियों का अड्डा बना हुआ है। इसके अलावे प्रखंड मे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अरंगी मे है परंतु यहां भी सरकार के द्वारा रोगियों के इलाज के लिए समुचित ब्यवस्था नहीं की है। प्रखंड के सिसरी, चौरिया, खरौंधी, अरंगी, अमरोरा, राजी, करिवाडीह मे उप स्वास्थ्य केंद्र की भवन बन कर तैयार हैं परंतु कोई भी चिकित्सीय ब्यवस्था नहीं है। इस प्रखंड के लोग दूसरे राज्यों मे इलाज कराने जाने के लिए मजबूर हैं। खरौंधी प्रखंड का चिकित्सा ब्यवस्था मे सुधार के लिए जनप्रतिनिधियों ने भी कोई ध्यान नहीं दिया। जिससे प्रखंड के लोग असमय बेमौत मर रहे है।
*क्या कहते हैं ग्रामीण*
मनोज शर्मा, कृपाशंकर चंद्रवंशी, देवबंद पाल, आलोक प्रजापति, कृष्णा प्रजापति आदि ने बताया हमलोगों का जिंदगी भगवान भरोसे है। छोटे से लेकर बड़े बीमारी के लिए गढ़वा, डाल्टनगंज, वाराणसी जाना पड़ता है। छोटे बीमारी का इलाज में जितना खर्च नहीं होता उससे ज्यादा ही आने जाने में खर्च हो जाता है। जबकि प्रखंड कार्यालय के समीप लगभग 3.50 करोड़ का हॉस्पिटल बनकर तैयार है लेकिन विभाग के लापरवाही की वजह से हॉस्पिटल बंद है। कोरोना काल में प्रखंड के दर्जनों लोग का करोना संक्रमण से उनका असमय मौत हो गया। कोरोना काल में भी हॉस्पिटल को नहीं चालू करवाया जा सका इससे दुर्भाग्य की बात क्या हो सकती है। कोरोना काल में जब भी प्रखंड वासी कोरोना से संक्रमित होते थे तो उन्हें श्री बंशीधर नगर कोविड-19 हॉस्पिटल में रहकर इलाज किया जाता था। खरौंधी में 3.50 करोड़ का हॉस्पिटल होने के बावजूद भी इसे कोविड-19 हॉस्पिटल नहीं बनाया गया।
*क्या कहते हैं जनप्रतीनिधी*
1. प्रखंड में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिये विधायक भानु प्रताप शाही ने अस्पताल भवन निर्माण कराया था। दस वर्षों से झारखंड सरकार से मांग कर रहे हैं जिसके फलस्वरूप पूर्ववती रघुवर सरकार के कार्य काल मे स्वास्थ्य मंत्री रामचन्द्र चंद्रवंशी जी ने प्रखंड अस्पताल में डाक्टर का पद सृजित करने का कार्य किया था। परन्तु वर्तमान सरकार के विधानसभा सत्र के दौरान स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से विधायक भानु प्रताप शाही ने डाक्टर बहाल कर हॉस्पिटल को चालु कराने का मांग किया। जिस पर मंत्री बन्ना गुप्ता ने अप्रैल माह से ही पदस्थापित कर चालु करने की घोषणा किया था। लेकिन झारखंड सरकार तथा विभाग भी हॉस्पिटल में डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति कर चालू नही कराये। जिसका खामियाजा प्रखंड के 80 हजार लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
उपेंद्र दास
विधायक प्रतिनिधि खरौंधी
2. खरौंधी में आए दिन दुर्घटना होते रहता है। प्रखंड में इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण घायल व्यक्ति को भवनाथपुर स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाते है। अधिकांश घायल व्यक्तियों का भवनाथपुर से पहले ही रास्ते में ही उसकी मृत्यु हो जाती है। जिसे देखते हुये जिला परिषद सदस्य आभा रानी के द्वारा गढ़वा बोर्ड की बैठक में कई बार बंद हॉस्पिटल को चालू कराने का प्रस्ताव लाया गया था। इसके अलावे झारखंड राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से मिलकर भी बंद हॉस्पिटल को अभिलंभ चालू कराने का भी मांग किया था। जिसपर मंत्री बन्ना गुप्ता ने संज्ञान लेते हुये जल्द हॉस्पिटल को चालु कराने का आश्वासन दिया था।
राजेश कुमार रजक
20 सूत्री अध्यक्ष खरौंधी
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