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महापरिवर्तन जन आंदोलन की पदयात्रा का 15दिन है। पदयात्रा जनतंत्र की जननी वैशाली से शुरू हुई थी और पटना, अरवल,  बकुइया होते हुए गढ़वा पहुंची है। यहां लोगों से पदयात्रा के उद्देश्यों की चर्चा की गई, जिसके तहत तीन कानूनों की मांग की जा रही है जो जनता को शासन करने की शक्ति देगी और शत्ता का विकेंद्रीकरण होगा जिससे भ्रष्टाचार पूर्ण रूप से बंद किया जा सकता है। पदयात्रा में राईट टू रिकॉल के तहत जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को जनता के द्वारा हटाने का अधिकार मिलेगा, राईट टू रेफरेंडम के तहत किसी भी नए कानून के लागू होने में जनता की राय लेने की बाध्यता होगी, और राईट टू प्रपोज अमेंडमेंट के तहत जनता के सुझावों को नए कानून में डालने का अधिकार होगा। यह पदयात्रा बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा से दिल्ली तक जाएगी। इस पदयात्रा में जय सिंह  राजपूत, प्रियंका मिश्रा, संजय चंद्राकर,, नवीन कुमार ठाकुर और पर्यावरणविद डॉ धर्मेंद कुमार ने जनसंवाद के माध्यम से लोकतंत्र में जनता की निहित शक्तियों और अधिकारों की चर्चा की और कहा की अगर हमारी मांग पूरी हो जाती है तो ये जनता की जीत होगी और असल जनतंत्र की शुरुआत होगी। इस यात्रा के दौरान पैदल चलकर सफर तय किया जाता है और जगह-जगह लोगों को इकट्ठा कर अपने तीनों कानून की विस्तार से जानकारी दी जाती है और बताया जाता है कि किस तरह इन कानूनों के लागू होने पर भ्रष्टाचार जड़ से खत्म की जा सकती है। यात्रा का अगला पड़ाव रांका झारखंड) होगा।

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