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अचानक चलने में दिक्कत, जबान का लड़खड़ाना, चेहरे पर पॉलिस, आंख की कमजोरी हैं स्ट्रोक के लक्षणसावधानी बरतें तो स्ट्रोक नहीं है जानलेवा: डॉ संजीव - Garhwa Drishti

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अचानक चलने में दिक्कत, जबान का लड़खड़ाना, चेहरे पर पॉलिस, आंख की कमजोरी हैं स्ट्रोक के लक्षण
सावधानी बरतें तो स्ट्रोक नहीं है जानलेवा: डॉ संजीव


गढ़वा। ब्रेन, स्ट्रोक, स्पाइनल, पार्किंसन, लकवा, मिर्गी, चलने में दिक्कत, नसों और मसल्स में दिक्कत,एक आंख से दिखाई देना, एक ही वस्तु दो-दो दिखाई देना जैसी समस्या में से किसी एक या उससे ज्यादा तकलीफ से प्रायः लोग ग्रसित हो रहे हैं। इन बीमारियों के बारे में यहां तक कहा जाता है कि इनमें से किसी परेशानी के ग्रस्त व्यक्ति जिंदगी भर दवा पर आश्रित हो जाता है और उसे हर क्षण मौत की घण्टी सुनायी देती है। लेकिन ऐसा नहीं है। यह दावा है देश की राजधानी दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में लंबे समय तक इन रोगों का इलाज करने वाले न्यूरोलॉजिस्ट डॉ संजीव कुमार शर्मा का। फिलवक्त झारखंड की राजधानी रांची के पारस हॉस्पिटल से एसोसिएट डॉ शर्मा गढ़वा के चिनिया रोड स्थित क्लिनिक ऑन स्क्रीन में प्रत्येक महीने के तीसरे रविवार को इस क्षेत्र के मरीजों के लिए उपलब्ध हुए हैं। न्यूरो समस्या से बचे रहने के सवाल पर एम्स से अनुभव प्राप्त मस्तिष्क और नस रोग विशेषज्ञ डॉ शर्मा ने कहा कि न्यूरो से सम्बंधित कई बीमारियां होती है। इसमें एक महत्वपूर्ण बीमारी है स्ट्रोक। इससे बचने के लिए सुगर और बीपी का आदर्श कंट्रोल बहुत जरूरी है। लेकिन इसके इरिवरसेबल कारण हैं बढ़ते उम्र। बढ़ते उम्र के कारण हर्ट की कंडक्सन चैनल गड़बड़ हो जाती है। इस कारण अचानक हर्ट में क्लॉट बन जाता है और वह ब्रेन में चला जाता है। जो मौत का कारण बन जाता है।

कम उम्र में स्ट्रोक का कारण और निदान

डॉ शर्मा ने कहा कि आज 40-45 वर्ष से कम उम्र के लोग भी स्ट्रोक का शिकार बन रहे है। इसका प्रमुख कारण शुगर, बीपी, मोटापा, स्मोकिंग और अल्कोहल है। अपने लाइफ स्टाइल को बदलकर और स्मोकिंग-अल्कोहल को त्याग कर इससे बचा जा सकता है।

स्ट्रोक नहीं है जानलेवा

डॉ संजीव ने कहा कि स्ट्रोक की बीमारी जानलेवा नहीं है बशर्ते इसे ठीक से समझ लें। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक आने पर अक्सर लोग मरीज को बीपी की दवा और पानी दे देते है। यह दवा और पानी सांस की नली में चली जाती है और निमोनिया हो जाता है। वहीं मौत का कारण भी बन जाता है।

बचाये जा सकते हैं स्ट्रोक के 80 प्रतिशत मरीज

डॉ संजीव ने कहा कि स्ट्रोक आने के साढ़े चार घण्टे के अंदर इलाज शुरू होने पर 70 से 80 प्रतिशत मरीजों को बचाया जा सकता है। उन्होंने वेहोश हुए स्ट्रोक के मरीजों के मुंह में चम्मच, अंगुली अथवा अन्य पदार्थ नहीं डालने की सलाह दी। उन्होंने ऐसे मरीजों को बाएं करवट सुलाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से मरीज की लार सांस की नली में नहीं जा पाती है। इस विधि से मरीजों की मरने की संभावना 50 प्रतिशत कम हो जाती है।
डॉ शर्मा ने मिर्गी के मरीजों पर अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि इस बीमारी के कई प्रकार हैं। कई मरीज चार-चार, पांच-पांच दवा खाते हैं फिर भी मिर्गी ठीक नहीं होती है। जरूरत है उन्हें वास्तविक दवा की। यह मरीज के परीक्षण से पता लगाया जा सकता है।

जीवनदायी साबित हो रहा है क्लिनिक ऑन स्क्रीन

उन्होंने कहा कि गढ़वा का क्लिनिक ऑन स्क्रीन जटिल रोग से ग्रसित मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हो रहा है। वह स्वयं यहां उपलब्ध व्यवस्था से प्रभावित हैं। वह प्रत्येक महीने से तीसरे रविवार को इस क्लिनिक में मरीजों का इलाज करेंगे। यह क्लिनिक मरीजों की हर सुविधा उपलब्ध कराने में सक्षम है।

परामर्श संबंधित किसी भी तरह के जानकारी हेतु 7061962110 अथवा 9835771738 पर सम्पर्क करें।

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