


रंजन कुमार पासवान कि रिपोर्ट
डंडई प्रखंड के लवाही मंगरदाह मंदिर परिसर में अतिक्रमण का विवाद गहराता जा रहा है। मंगलवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर मंदिर परिसर के चारों ओर हो रहे कथित अवैध कब्जे के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व धीरे-धीरे मंदिर की भूमि पर कब्जा जमा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजन और मंदिर तक पहुंचने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यह मंदिर कई पीढ़ियों से आस्था, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का केंद्र रहा है। यहां प्रतिदिन पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और त्यौहारों पर विशेष आयोजन होते हैं। दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं मंदिर से गहराई से जुड़ी हैं
ग्रामीणों ने सीधे तौर पर बशरूदीन अंसारी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि अंसारी ने मंदिर परिसर के पास स्थित कई नीम के पेड़ काट दिए, जिन्हें श्रद्धालु पवित्र मानकर पूजते थे। इसके अलावा उन्होंने मंदिर कमिटी पर ही झूठा केस दर्ज करा दिया ताकि माहौल को भ्रमित किया जा सके। ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर की जमीन पर कब्जा करने के लिए ईंट-बालू गिराया गया, मिट्टी डाली गई और यहां तक कि मवेशी बांधकर मंदिर परिसर की पवित्रता को ठेस पहुँचाने की कोशिश की जा रही है।
विरोध प्रदर्शन में बलदेव साव, कामेश्वर चंद्रवंशी, लालबिहारी यादव, पप्पू यादव, उमेश पासवान, धर्मदेव ठाकुर, बलराम बैठा, सुनील चंद्रवंशी, राहुल पासवान और गोरेलाल साव सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि “मंदिर परिसर पर किसी भी कीमत पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
लालबिहारी यादव ने चेतावनी दी – “यदि मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा हुआ तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए कलंक होगा। हम सब इस आस्था स्थल को बचाने के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करेंगे
इस विवाद पर सीओ जयशंकर पाठक ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दोनों पक्षों को नोटिस भेजा गया है और जल्द ही जांच पूरी कर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं मुखिया बच्चा लाल ने भी ग्रामीणों का साथ देते हुए कहा कि “मंदिर परिसर की भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण किसी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। पंचायत प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर इसे रोकेंगे।”
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। स्थिति को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। फिलहाल, प्रशासन की जांच और निर्णय का सभी को इंतजार है।