

गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड स्थित ग्राम बेलोपाती में आज नवरात्र महापर्व का समापन भावनाओं के सागर में डूबकर हुआ। मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन जैसे ही शुरू हुआ, गांव में आस्था के साथ-साथ विरह का भाव भी उमड़ पड़ा। सुबह से ही पूरा गांव भक्ति में डूबा था, लेकिन जैसे ही मां की प्रतिमा को अंतिम विदाई के लिए सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल की ओर ले जाया गया, माहौल भावुक हो उठा। ढोल-नगाड़ों की धुन पर भक्ति की गूंज थी, लेकिन आंखों में आंसू थे। मां मत जाओ यह पुकार हर उम्र के श्रद्धालु की जुबां पर थी। कई लोग प्रतिमा से लिपटकर रो पड़े।
बच्चियां मां को जाते देख सिसकने लगीं।
बुजुर्गों की आंखें नम थीं — मानो अपनी मां से बिछड़ रहे हो। विसर्जन से पहले की आरती में हर आंख भीगी थी। हर दिल भारी था। जब मां की प्रतिमा पवित्र नदी में समाई, तो मानो गांव का एक हिस्सा उससे बिछड़ गया। इस पूरे आयोजन की कमान नव युवक संघ कमिटी बेलोपाती ने संभाली, अध्यक्ष ओम प्रकाश कुमार के नेतृत्व में। पूरे आयोजन को भव्यता से सजाया गया, लेकिन मां की विदाई के क्षणों ने हर चेहरे पर ग़म की परछाई छोड़ दी। श्रद्धालुओं में प्रमुख रूप से आलोक मिश्रा, गिरीश मिश्रा, हर्ष मिश्रा, विकास कुमार, जितेंद्र कुमार, हरिओम कुमार आदि शामिल रहे। लोगों ने कहा ये आयोजन सिर्फ पूजा नहीं, गांव की आत्मा से जुड़ा पर्व है… और मां की विदाई, एक संतान के बिछड़ने जैसा लगता है जय माता दी के गगनभेदी नारों के साथ मां को विदा किया गया —
लेकिन हर मन में बस एक ही बात थी मां जल्दी लौट आना… अब बिना तेरे ये गांव अधूरा लगेगा |
विदाई थी मां की… पर रोया हर दिल… और दुआओं में बस एक ही प्रार्थना – फिर आना मां…