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खरौंधी प्रखंड से चंदेश कुमार पटेल की रिपोर्ट

गढ़वा। रंगों का त्योहार होली खुशियों और अपनों के साथ मिलन का पर्व माना जाता है लेकिन गढ़वा जिले के कई मजदूरों का यह होली दूसरे प्रदेश में बीत रही है। रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे प्रदेशों में काम कर रहे मजदूरों ने अपने दिल का दर्द बयां करते हुए कहा की अगर उनके क्षेत्र में इंडस्ट्री या रोजगार की समुचित व्यवस्था होती, तो आज वे गुजरात में नहीं, बल्कि अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ गांव में होली मना रहे होते।

मजदूरों का कहना है की चुनाव के समय रोजगार का मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाता है। नेता वादे करते हैं, चुनाव जीत भी जाते हैं, लेकिन रोजगार की ठोस व्यवस्था नहीं हो पाती। नतीजा यह है कि उन्हें अपने परिवार से दूर रहकर दो पैसे कमाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

इसी दर्द को बयां करते हुए गढ़वा जिला के खरौंधी प्रखंड अंतर्गत कुपा गांव के मजदूर पप्पू विश्वकर्मा ने कहा, हमारी भी इच्छा थी की इस बार होली अपने घर में परिवार के साथ मनाएं लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ऐसी है की आंखों के आंसू पोंछकर परदेस में मजदूरी करनी पड़ती है। परिवार की खुशियों के लिए खुद की इच्छाओं को दिल में दबाना पड़ता है।

उन्होंने आगे कहा की हमारे क्षेत्र भवनाथपुर में पावर प्लांट लगाने का वादा किया गया था। अगर वह योजना धरातल पर उतर जाती, तो शायद आज हमें गुजरात में काम करने नहीं आना पड़ता और हम अपने क्षेत्र में ही रोजगार पाकर परिवार के साथ होली मना रहे होते।

पप्पू विश्वकर्मा जैसे सैकड़ों मजदूरों की यही कहानी है। त्योहार के दिन भी अपनों से दूर रहकर मेहनत करना। जब तक स्थानीय स्तर पर उद्योग और रोजगार की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक गढ़वा के कई घरों की होली यूं ही परदेस में फीकी पड़ती रहेगी।

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chandeshraj1

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