
चंदेश कुमार पटेल की रिपोर्ट
खरौंधी(गढ़वा) । पूर्व उपप्रमुख सह आजसू प्रवक्ता गोरख नाथ चौधरी ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार से तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नेमरा गाँव, जो पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन एवं तीन बार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पैतृक गाँव है, वहाँ महज़ दस दिनों में सड़क, बिजली, पानी और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध करा दी गईं। सरकार के निर्देश पर अफसरों ने रात-दिन काम किया और नेमरा गाँव देखते ही देखते वाई-फाई युक्त रोशनी से जगमगाने लगा।
गोरखनाथ चौधरी ने सवाल खड़ा किया कि आखिर यह विकास केवल नेमरा तक ही क्यों सीमित है? अगर नेमरा गाँव में 10 दिनों में यह सब संभव हो सकता है, तो झारखंड के अन्य गाँवों में क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि एक साधारण योजना को पूरा करने में विभाग दशकों लगा देता है, जबकि नेमरा में ठेकेदारों ने बिना टेंडर फंड पाकर तेजी से काम पूरा कर दिया।पूर्व उप प्रमुख ने कहा कि यह सोचने वाली बात है कि क्या विकास केवल इसलिए संभव हुआ क्योंकि नेमरा किसी बड़े नेता का गाँव है? उन्होंने कहा कि झारखंड में पैसे की कोई कमी नहीं है, बल्कि कमी है तो सिर्फ़ नियत और प्राथमिकता की। जहाँ सरकार चाहती है वहाँ अफसर रातभर काम करते हैं और गाँव जगमगाने लगते हैं, लेकिन जहाँ नहीं चाहती वहाँ वर्षों से शिलान्यास केवल कागजों में ही दबे रह जाते हैं।उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या विकास का हक सिर्फ नेमरा गाँव का है? क्या बाकी झारखंडी जनता “कम झारखंडी” है? क्या मूल निवासियों का अधिकार सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगा?
जनता की उम्मीद को सामने रखते हुए श्री चौधरी ने कहा कि झारखंड के हर गाँव का हक है कि वह भी 10 दिनों में सड़क और रोशनी देख सके। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या अब विकास के लिए हर गाँव में एक दिशोम गुरु की जरूरत होगी?चौधरी ने उम्मीद जताई कि सरकार इस प्रकरण से सबक लेकर अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेगी और पूरे झारखंड को “नेमरा” बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएगी, ताकि विकास का लाभ हर गाँव और हर नागरिक तक पहुँच सके।