महत्वाकांक्षा व स्वाभिमान में मैंने स्वाभिमान को हमेशा आगे रखा:- नामधारी
*मेदिनीनगर पलामू जिला ब्यूरो चीफ लवकुश कुमार सिंह की रिपोर्ट***
मेदिनीनगर स्थित चंद्रा रेसीडेंसी में झारखंड के प्रथम अध्यक्ष लिखित ‘एक सिख नेता की दास्तान’ का लोकार्पण हुआ।
प्रोफेसर सुभाष चन्द्र मिश्रा के मुख्य अतिथित्व एवं अधिवक्ता अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा की अध्यक्षता में डा.आर.पी.सिन्हा,प्रेम भसीन,अजित सिंह नामधारी,अशलेश पाण्डेय, डॉ.जी.एन.खान, बलिराम शर्मा ने संयुक्त रूप से लोकार्पण किया। संचालन कवि राकेश कुमार ने किया। स्वागत भाषण कवि अनुज कुमार पाठक ने दिया।
पुस्तक परिचय शिक्षक परशुराम तिवारी द्वारा कराया गया। वहीं सरस्वती वंदना व गुरु गोविंद सिंह स्मरण कवि रामप्रवेश पंडित ने किया।
साहित्यकारों, प्रबुद्धजनों व सुधी जनों से खचाखच भरे समारोह को संबोधित करते हुए आत्मकथा के लेखक इन्दर सिंह नामधारी ने कहा कि इसके पहले जमशेदपुर में पुस्तक लोकार्पण करने का ऐतिहासिक कारण है। दरअसल भाजपा कार्यकारिणी की जमशेदपुर में आयोजित बैठक में दक्षिण बिहार के हिस्से को पृथक कर झारखंड बनाने के उनके प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी। वृहत झारखंड बनाने की मांग ‘नौ मन काजल होगा न राधा नाचेगी’ की तरह था। उन्होंने कहा कि हमने हर बात को निष्पक्षता के साथ लिखा है। उन्होंने कहा कि लोग पूछते थे कि सिख होकर आप पलामू में छह बार विधायक एवं चतरा से सांसद कैसे चुने गये? मैंने पुस्तक में स्पष्ट किया है कि जात-पात व धर्म-सम्प्रदायवाद की लकीर सामने जनसेवा की लंबी लकीर खींचकर विजयी होते रहा हूं। कहा कि महात्वाकांक्षा व स्वाभिमान में मैंने हमेशा स्वाभिमान को आगे रखा है।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर सुभाष चन्द्र मिश्रा ने कहा कि आत्मकथा लिखना साहस की बात है। नामधारी जी की पुस्तक आत्मकथा भर नहीं बल्कि यह एक जीवन दर्शन है। यह सभी के लिए उपयोगी है। राजनीति में रूचि लेने युवा इसे अवश्य पढ़ें।
इसे सफल बनाने में प्राचार्य पी.पी.गुप्ता, सुखदीप कौर, राकेश ठाकुर,विजय पाण्डेय,कुणाल किशोर,अमित वशिष्ठ , अनिल पाण्डेय, सुरेन्द्र कुमार सिंह , ओमप्रकाश व धनंजय पाठक ने सक्रिय भूमिका निभाई।
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