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गढ़वा दृष्टि के ईस खास पेशकश में आपसबो का स्वागत है।
आइए लेकर चलते हैं गढ़वा विधानसभा के विधायक व झारखंड सरकार के पेयजल एवम स्वच्छता मंत्री और झारखंड मुक्तिमोर्चा के महासचिव माननीय मिथिलेश कुमार ठाकुर की जीवंत कहानी की ओर जो आज पलामू गढ़वा सहित पूरे झाखरण्ड की पहचान बन चुके हैं। आज उनका जन्मदिन है , आज माननीय 56 वर्ष के हो गए। गढ़वा दृष्टि की ओर से उन्हें ढेर सारी बधाईयां और शुभकामनाएं। गढ़वा में आने से लेकर मंत्रि बनने तक का सफ़र की कहानी प्रेरणादायक है। कभी वें लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े थें, अपने जीवन के सफ़र में ब्यापार का सहारा लिया और राजनीतिक में रुझान रहने से उनके कदम राजनीति में बढ़ते चले गए। दो बार विधायक चुनाव में हारने के बाद भी अपनी इच्छा शक्ति को प्रबल रखते हुए बवे जीत की मुकाम पर पहुंचें।

आईए जानते है उनका जिवन

मंत्रि मिथिलेश का जन्म 16 फ़रवरी 1966 को चतरा जिला में मिथला ब्राह्मण परिवार, स्व. कौशल कुमार ठाकुर ओर स्व. विमला ठाकुर के घर उनके तीसरे पुत्र के रुप में हुआ था।
प्रारंभिक शिक्षा नाज़ारेथ विद्या निकेतन से हुए वहा उहोंने कक्षा छः तक पढ़ाई की, उनके पिता जी तबादले के बाद 1977 में वह गढ़वा आए उन्होंने गोविंद हाई स्कूल से अपने मैट्रिक की परीक्षा दी। पुनः उनके पिता का तबादल चाईबासा हुआ, चाईबास के टाटा कॉलेज से उन्होंने इंटर पास किया फिर उसके बाद उन्होंने संत कोलम्बा महाविद्यालय हजारीबाग से स्नातक की शिक्षा ग्रहण की।

उनके पिता फॉरेस्ट ऑफिस से चाईबासा में ही रिटायर हुए, इस वजह से उनका पूरा परिवार चाईबासा में ही बस गए।

1989 मे उहोंने अपनी राजीतिक की शुरूवात झारखंड मुक्ति मोर्चा से की, एक मामूली कार्यक्रता से बड़े नेता के रुप में उभरें। 1995 में कुछ हालातों के कारण उन्होंने झामुमो का दामन छोड़ना पड़ा। फिर उन्होंने लालू यादव की पार्टी राष्ट्रिय जनता दल से की सदस्यता ली, और राष्ट्रिय जनता दल में शामिल होते ही उनको एक बड़ी जिम्मेदारी मिले उनको चाईबासा का नगर अध्यक्ष चुना गया,
बहुत कम ही अंतराल में उनकी काबिलियत को देख उनको राष्ट्रिय युवा जनता दल का जिलाध्यक्ष चुना गया, उसके बाद 1999 में वहा जिला संगठन का चुनाव हुआ उसमें उनको भारी बहुमत मिलने के कारण जिलाध्यक्ष (सरायकेला, पश्चिम सिंहभूम के) मनोनित किया गया।

फिर 2000 झारखंड राज्य की स्थापना के बाद वह पुण्य झारखंड मुक्ति मोर्चा में वापस आगए।

चाईबासा नगर पर्षद में 2008 व 2013 में उपाध्यक्ष पद पर रहे, 2018 में पहली बार चाईबासा अनारक्षित सीट से लड़कर चेयरमैन बने,

चाईबासा में संविधानिक पद रहते हुए ही 2009 में उनका आगमन अपने कर्म भूमि गढ़वा में हुआ, गढ़वा से उन्होंने 2009 में अपना पहला विधानसभा का चुनाव लडा लेकिन वह पहली बार विफल रहे दोबारा उन्होंने ने 2014 गढ़वा सीट से ही चुवान लडा मगर दूसरी बार भी उनकी तक़दीर ने उनका साथ नहीं दिया, लेनिक वह हार नही माने तीसरी बार उन्होने फिर से गढ़वा से चुनाव लडा और भारी बहुमत से जीते, 15 साल की कड़ी मेहनत का फल उन्हें मिला है। दो बार लगातार हारने के बाद भी वो डटे रहे। नतीजतन गढ़वा सीट जीतकर आज झारखंड सरकार में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री हैं।

मिथिलेश कुमार ठाकुर एक शानदार फुटबाल खिलाड़ी भी रह चुके है, चाईबासा में होनेवाली ए डिवीजन फुटबॉल लीग के वो कभी बेहतरीन खिलाड़ी हुआ करते थे, फुटबाल के मैदान में गोल दागने वाले मिथिलेश ठाकुर जनता के बीच मुन्नू ठाकुर के नाम से विख्यात है, चाईबासा में सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन के महासचिव हैं, उन्हें झारखंड फुटबाल एसोसिएशन का 10 अगस्त 2019 को चेयरमैन बनाया गया है।
अब चलते हैं उनकी परिवार की और मिथिलेश कुमार ठाकुर जी की शादी 18 जून 2004 को चंचल ठाकुर जी से हुई थी, इनकी दो बेटीया हैं, प्रत्यक्षा ठाकुर ओर प्रत्युषा ठाकुर।मिथिलेश कुमार ठाकुर जी चार भाई और चार बहने हैं, बड़े भाई अमरनाथ ठाकुर, रंजीत ठाकुर ओर छोटे भाई विनय ठाकुर। मिथिलेश कुमार ठाकुर जी का ससुराल बिहार के वैशाली जिला के हसनपुर में है। उनके ससुर का नाम मोहन मिश्रा हैं।

चाईबासा के अमलाटोला में होने वाला काली पूजा से उनका अटूट रिश्ता बना हुआ है।
गढ़वा में भी उन्होंने अपने निजी कोष से जिला मुख्यालय शहर के बीचों बीच घण्टा घर का निर्माण किया जो लोगों को अपने सुंदर आकर्षक से मोहने का काम करता हैं, तथा बाबा खोनहर मंदिर का तोरण द्वार बनवाया हैं। इसके साथ ही कई योजनाओं का शिलान्यास, सड़कों और पुलो का मरम्मती व जीर्णोधार, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधारीकरण, वीर शहीदों का सम्मान, निर्बाध बिजली आपूर्ति, लोगो से व्यक्तिगत पारिवारिक रिश्तों के साथ मिलना और उनकी समस्याओं को सुनना और निराकरण करना के साथ सभी प्रकार के समस्याओं से लड़कर गढ़वा को नई उड़ान भरने का कार्य में मंत्री मिथलेश अग्रसर हैं। अपने तौर तरीकों से सभी समुदायों में उन्होने एक सकारात्मक पहचान बनाई है।

यह लेख शुभम केसरी द्वारा लिखी गई है जो काफी मनोरित करता है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला प्रवक्ता धिरज दुबे जी को धन्यवाद जिन्होंने इन जानकारियों को हमारे साथ सांझा की।

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Admin Garhwa Drishti

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